पिछले करीबन एक साल से देश के अंदर किसान आंदोलन चल रहा था। Farmer’s Protest को चलाने वाले नेता साल भर देश की जनता को यह कहते आ रहे थे की वे लोग राजनेतिक फायदे के लिए यह आंदोलन नही कर रहे हैं बल्कि उनका देश के किसानों के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव हैं जिसके कारण वह यह आंदोलन चला रहे है।
ताजा मिली जानकारियों के अनुसार Punjab में आने वाले विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने मुख्यमंत्री चेहरे को भी घोषित कर दिया हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब में चुनाव लडने की घोषणा की
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना हैं की वे सभी 117 सीटो पर चुनाव लडने वाले हैं।
मेने आज से साल भर पहले भी यही कहा था की ये सारे नेता आम किसानों और जनता को मूर्ख बनाने में लगे हुए हैं। ये सब अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने में लगे हुए हैं।
उस समय किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और न ही गौर किया, आज देख लो जो हमने कहा था वह बिल्कुल सच साबित हो रहा हैं।
इन लोगो को किसानों से कोई मतलब नहीं था बल्कि ये सब अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने में लगे हुए थे। आज जब यह बात मीडिया में आई है तो कुछ जान पहचान वाले साथी कह रहे है कि भाई आपको कैसे पता था की ये लोग चुनाव लडेंगे।
मेरा सीधा सा जवाब यही हैं, अगर आपमें समझ होती तो आप तभी समझ जाते हैं की जिन कृषि कानूनों से किसानों का भला होना हैं। देश के किसानों की आय में वृद्धि के लिए लाए गए तीन कानून को जान बुझकर वापिस लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाया गया क्योंकि ये सभी जानते थे कि अगर ये कानून लागू हो गए तो इनकी राजनीति जो की केवल किसान के नाम पर चलती हैं उसकी दुकान बंद हो जाएगी, इनको किसानों को चिंता नही थी इनको दिक्कत थी की इनके राजनेतिक स्वार्थ अब केसे साधे जायेंगे।
देश की आम जनता और भोले भाले किसानों को मूर्ख बनाने का काम ये राजनेता आज से नहीं बहुत पहले से करते आ रहे हैं और इस बार इन्होंने फिर से वही काम किया हैं।
कुछ कांग्रेसी चमचे और इन तथाकथित किसान नेताओं के तलवे चाटने वाले लोगों को यह लेख जरा भी पसंद नहीं आने वाला है, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है यह सारा खेल उन्होंने अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने के लिए खेला था और आज वह उसे पूरा करने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं अभी केवल पंजाब के लिए उन्होंने विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने और मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा की है अभी यह खेल बाकी के 4 राज्यों में भी खेला जाने वाला है।
किसान नेताओं ने पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कि।
वहां पर विजय तथाकथित किसान नेता अपने प्रत्याशी खड़े करेंगे और केंद्र सरकार के खिलाफ अपने विरोध अभियान को एक नई शुरुआत देंगे।
यह सारा खेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के कारण हो रहा है क्योंकि यह सब जानते हैं कि वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ना तो भ्रष्टाचार करते हैं और ना अपनी सरकार में किसी को करने देते हैं। इसीलिए इन सब राजनीतिक धंधे बंद हो चुके हैं।
अनाज की बड़ी-बड़ी मंडियों के मुख्य दलाल सारे इन्हीं नेताओं के खास आदमी रहते हैं, जिसका प्रतिशत कमीशन के रूप में इनको भी जाता है। किसानों के लिए आवाज उठाने का नाटक करके देश की आम जनता को 1 साल से ज्यादा तक परेशान किया और जहां पर यह रुके हुए थे, वहां पर चारों तरफ गंदगी फैला कर रखी थी और कहते हैं कि ये किसान थे।
किसान कभी भी अपने खेत में इस तरह की गंदी हरकतें नहीं करता जो इन लोगों ने आंदोलन स्थल के ऊपर की थी,
अगर इनको कोई खालिस्तानी कहता है तो इनकी मिर्ची लगती है, जबकि यह बिल्कुल सत्य है किसान आंदोलन के अंदर खालिस्तान समर्थक नारे लगे थे और बहुत से लोग उसमें शामिल थे जो खालिस्तानी समर्थक थे।
पिछले साल गणतंत्र दिवस के ऊपर आपने देखा था कि कैसे इन देशद्रोहियों ने लाल किले के ऊपर एक धर्म ध्वज फहराकर लाल किले का अपमान किया था, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि वह कोई धार्मिक स्थल नहीं था।
देश की आजादी के बाद आज तक वहां पर केवल तिरंगा फहराया जाता था जबकि इन लोगों ने उस तिरंगे को उतार कर फेंक दिया था जो कि बहुत ही गलत कार्य था फिर भी कुछ राजनेताओं ने इनको समर्थन दिया उनमें से राहुल गांधी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जेसे नेता शामिल थे।
राहुल गांधी पता नहीं कौन सी राजनीति करने की कोशिश में लगे हैं जबकि वह खुद भी जानते हैं कि नरेंद्र मोदी के सामने उनकी कोई बिसात नहीं है। वे लोग सामने से नरेंद्र मोदी का सामना नहीं कर सकते हैं।
वर्तमान सरकार ने देश के अंदर विकास कार्यों को एक नई दिशा दी है। जहां पर पहले देश के अंदर अच्छे राजमार्ग नहीं हुआ करते थे, वही आज रोज नए नए राजमार्ग देश के अंदर बन रहे हैं और रोज करीबन 24 किलोमीटर के आसपास नए राजमार्गों का निर्माण निरंतर चला रहा है।
देश के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जी ने बहुत ही शानदार काम किया है राजमार्गों के निर्माण के लिए परंतु यह लोग उनका भी विरोध करने लग जाते हैं किसी ना किसी रूप से।
इनको बस अपने राजनीतिक स्वार्थ साधने से मतलब है, बाकी और किसी काम से इनको कोई मतलब नहीं है।
जैसे ही किसान नेताओं ने पंजाब के अंदर विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की तभी से राहुल गांधी और बाकी कुछ कांग्रेसी नेता बहुत ज्यादा जोश में आ चुके हैं कि वे शायद नरेंद्र मोदी को पंजाब विधानसभा चुनाव के अंदर मात दे सकते हैं।
मेरे अनुसार यह उनका वहम ही है और वहम ही रहेगा, क्योंकि जो विकास कार्य नरेंद्र मोदी के द्वारा किए गए हैं उनकी तुलना उनके जितना काम यह सात जन्म में भी नहीं कर सकते।
इनके बाप दादा जो देश को लूटने में लगे थे। सेना की जीप के नाम पर भी घोटाला कर के हजारों करोड़ खा चुके हैं ये लोग।
आज प्रियंका गांधी देश में माहोल बिगाडने के काम में लगी हुई हैं। राजस्थान में जहां कांग्रेस की सरकार हैं, वहां की परिस्थितियों के बारे में कभी बात नही करते ये गांधी परिवार वाले पर जहां पर भाजपा की सरकार हैं उस राज्य में जाकर थोथी राजनीति करने में लगे हुए हैं।
उत्तरप्रदेश के अंदर शिक्षक पात्रता परीक्षा के जब पेपर लीक हुए थे तब प्रियंका गांधी बहुत उछल कूद कर रही थी परंतु एक तरफ जहां राजस्थान में रीट परीक्षा के पेपर को लीक करने के लिए उनकी पार्टी के राजस्थान के अध्यक्ष और तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा खुद शामिल थे उस पर उनसे कुछ बोला नहीं गया, इसे ही दोगलापंती कहते हैं जो यह गांधी परिवार सालो से कर के देश को मूर्ख बनाता आ रहा हैं।