कृषि कानून रद्द होने के बाद भी धरने पर क्यों बैठे हैं,Rakesh tikait/farmers protest/delhi/sindhu border/delhi news today/congress ki nayi chal/hindi.

देश के अंदर गद्दार भरे बैठे हैं जो बस मौका देखते हैं के वर्तमान सरकार को किस मुद्दे पर घेरे, इनके पास जब कोई वास्तविक मुद्दा नहीं होता तो अपनी तरफ से नया ही मुद्दा बना देते हैं। 

Rakesh tikait आखिर क्यों बैठा हैं अब तक धरने पर?? इसका कारण क्या हैं?? 

क्या आप जानते हैं की इस rakesh tikait ने अपने बाप की इज्जत का सौदा कर के विदेशी फंडिंग लेकर देश में धरने पर पिछले एक साल से बैठा हैं। इसके इस धरने पर तीनो कानून को वापिस लेने के बाद भी बैठे रहने का क्या कारण हैं?? 
अगर आप लोग राजनीति की समझ रखते हैं तो आप जानते ही होंगे की वर्तमान सरकार में विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं हैं की सरकार पर उंगली उठाते इसलिए उन्होंने किराए पर एसे कुछ दल्लो को खरीदा जो सब कुछ बेचकर केवल उनकी चमचागिरी करे, और आज राकेश टिकैत वही कर रहा हैं। ये कांग्रेस का वो मोहरा हैं जो जब तक एसे ही आंदोलन करता रहेगा जब तक चुनाव नही होते। 
राजनीति में ऐसी चाले विपक्ष काफी पुराने समय से खेलता आ रहा है। महेंद्र जी टिकैत ने जिस व्यवस्था को लागू करने के लिए जीवन पर्यंत किसानों के लिए आंदोलन किए वही व्यवस्था जब वर्तमान सरकार ने लागू कर दी तो उन्ही महेंद्र जी टिकैत के बेटे rakesh tikait ने अपने बाप की इज्जत का सौदा कर के उसे बेच डाला और इन कानूनों के खिलाफ धरने पर आकर बैठ गया। 
क्या आप जानते हैं की इनका खर्चा कहां से आता हैं?? आखिर इन्हे इस धरने पर बैठे हुए एक साल से ज्यादा का समय हो चुका हैं।
जब सरकार ने तीनो कानूनों को वापिस लेने का निर्णय किया तो इन दलालों के पास आंदोलन के आगे चलाने के लिए जब कोई योग्य मुद्दा नहीं मिला तो इनके आकाओं की तरफ से नया फरमान मिला जिसमे उन्हें आदेश दिए गए की अब msp पर सरकार को घेरों। 
क्या आप जानते हैं की कोई भी सरकार msp पर कोई कानून क्यों नही बना सकती?? 

MSP par sarkar koi kanoon kyo nahi bana sakti??

मैं केवल मोदी सरकार की ही बात नही कर रहा जबकि यह सत्य हैं की मोदी क्या कोई भी सरकार हो msp पर कोई स्थाई कानून नही बना सकती। इसका कारण यह हैं की कोई भी देश अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत अपने देशवासियों को Subsidy तब तक ही दे सकता है। जब तक देश विकासशील हैं। विकसित देश में अनुदान नही दिया जा सकता।
ये बात इस देश के लोगो को जब समझ में आ जाएगी तब इन दलालों की दुकान बंद हो जाएगी और इनके पास कोई मुद्दा नहीं बचेगा।
आप अगर मेरी बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे हो तो आप कहोगे तो में उससे संबंधित Documents किसी भी अगले ब्लॉग में आपको दिखा सकता हूं।
शिक्षा के अभाव में देश के कई आम किसान इस डकैत की बातो में आ गए और अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार बैठे। 
इसके पास तो पैसे हैं, करोड़ों रूपये की संपति हैं जो चाहे किसी भी तरीके से अर्जित की गई हो पर हैं तो सही न, आप लोगों के पास क्या हैं?? 
जो 6000 रूपये सरकार की तरफ से किसान को आर्थिक सहायता मिलती हैं उसका मैसेज फोन में आते ही खुश होने वाले छोटे किसानों के साथ गद्दारी फिर से इस कांग्रेसी दल्ले ने और इसके आकाओं ने कर दी।
अगर देश के छोटे किसान एकजुट होकर इन दलालों का विरोध नही करेंगे तो आगे आने वाले समय में ये आपके हक का पैसा खा जायेंगे जैसे कांग्रेस सरकार करती आ रही हैं हमेशा से।

Rajasthan me kisano ke sath ho rahe अन्याय par kyo nahi bolte ye kisan neta??

राजस्थान में आप अपनी आंखो से देख लो, राजस्थान के मुख्यमंत्री ashok gehlot दिल्ली और उत्तरप्रदेश में हो रहे किसान आंदोलन पर ज्ञान देते रहते हैं परंतु जो छोटे किसान(farmers protest in rajasthan) राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में आंदोलन में कर रहे थे उनकी आवाज को दबा दिया, उन पर लाठी चार्ज किया गया?? 
तब इनका किसान प्रेम कहां धूल खा रहा था?? 
बिजली के बिल पर सरचार्ज बढ़ा दिया,जिससे हर महीने राजस्थान के लाखो किसानों को हजारों रुपए extra देने पड़ेंगे, पर इस मुद्दे पर राजस्थान का कोई किसान नेता नही बोलेगा, न ही अमराराम और न ही हनुमान बेनीवाल जो किसान आंदोलन से अपनी राजनीति को चमकाने में लगे थे। 
ये राजनीति का सबसे निचला स्तर हैं जिसमे आम जनता को उन्ही को मूर्ख बना कर लूटा जाता हैं और आम जनता खुशी खुशी अपनी मेहनत की कमाई इन दलालों को देती हैं कभी बिजली बिल के नाम पर तो कभी सरकारी कर्मचारियों से कोरोना के नाम पर।
दिल्ली में सरकार केजरीवाल की हैं जो बिजली के नाम पर जनता को मूर्ख बना रहा हैं। आपको दिल्ली सरकार विज्ञापन में ये तो बताती हैं की दिल्ली में बिजली मुफ्त हैं पर क्या आप जानते हैं की दिल्ली में बिजली कितने यूनिट तक मुफ्त हैं?? 
अच्छी बात हैं इससे lower middle class के लोगो को बहुत फायदा हुआ हैं पर बाकी और भी काम होते हैं एक राज्य सरकार के पास जिसके केजरीवाल और गहलोत दोनो पूर्ण रूप से फैल हैं।
दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त हैं परंतु अगर आपका बिजली खर्च 200 से 1 यूनिट भी ऊपर जाता हैं तो आपका जो 200 यूनिट माफ बताए गए हैं उन का भी बिल add हो कर आता हैं।
ये सब राजनीति के खेल हैं जिन्हे समझने के लिए उच्च कोटि का दिमाग होना आवश्यक हैं।
Rakesh tikait वही इंसान हैं जिसने जब ये तीनो कानून लागू हुए थे तब मीडिया में interview देकर सबके सामने स्वीकार किया था की जो मांग उनके पिताजी आदरणीय महेंद्र जी टिकैत की किसानों के लिए थी उसे आखिरकार मोदी सरकार ने लागू कर दिया, फिर कुछ ही दिनों में ऐसा क्या हुआ कि यही rakesh tikait जिन कानूनों को तारीफ करते थक नही रहा था उन्ही का विरोधी हो गया??
पैसा, बाबू भैया पैसा वो चीज हैं जो किसी के भी ईमान को बेचने पर मजबूर कर सकती हैं अगर वो इंसान आदर्शवादी और सिद्धांतवादी न हो, 

Opposition ke pas koi mudda kyo nahi hn sarkar ke khilaf??

देश में 2014 से जब से मोदी जी सत्ता में आए हैं तब से विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बच्चा था जिसमे ये सरकार को target कर सके, इसलिए मुद्दे ढूंढ ढूंढ कर लाए गए। 
कभी मोदी का हत्यारा बताया गया तो कभी चोर परंतु फिर भी ये देश द्रोही वामपंथी कभी कामयाब नही हो पाए।
अब जब उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव पास में हैं तो मोदी जी और योगी को साथ में घेर कर इन पर हमला करने की योजना बनाई गई हैं पूरे विपक्ष के द्वारा मिल कर, परंतु फिर भी उनके सामने ये वामपंथी टिक नही सकते।
जिस कांग्रेस ने हमसे हमारा अभिमान कैलाश छीनकर अपने चीन वाले आका को दे दिया आज वही congress देश की आम जनता को फिर से गुमराह करने में लगी हैं।
यह वही कांग्रेस सरकार थी जिसने यूरेनियम के foreign companies से deal करने के लिए, रामायण और भगवान राम तक को काल्पनिक बता दिया था।
आज जब इनके सर तक बात आ गई तो दूसरे धर्म के होते हुए भी Rahul Gandhi कपड़ो के ऊपर से जनेऊ पहनकर आते हैं ताकि देश की जनता की ब्राह्मण बन कर फिर से मूर्ख बना सके, जैसा इन्हीं के परिवार के एक सदस्य जो देश के प्रथम प्रधानमंत्री भी थे उन्होंने किया था।
आज जब देश की आम जनता जागरूक हो चुकी हैं और अपना भला बुरा समझने लगी हैं तो इनके अरमान जब मिट्टी में मिल रहे हैं ऐसा इन्हे लगने लगा तो इन्होंने एक नया खेल खेल डाला, वो जातिगत राजनीति, जातिगत राजनीति वैसे देश में नई नही हैं। इस जातिगत राजनीति के प्रथम सूत्रधार यही कांग्रेस वाले ही थे। 
सिक्खों के बाने में कोन हैं ये लोग??
आज जब किसान आंदोलन में पंजाब के किसान सबसे ज्यादा मात्रा में थे तो इन्होंने अगला लक्ष्य यही बनाया की पंजाब के सरदारों को मूर्ख बना कर फिर से सत्ता में आया जाए। 
सिक्ख इस देश की शान हैं और वास्तविक सरदार कभी भी देश का विरोधी नहीं हो सकता। सरदार देश भक्त होते हैं ओर ये बात पूरा भारत जानता हैं। 
आप राजनीति की हद देखिए, कांग्रेस ने जिन सिक्खों का कत्लेआम किया था आज उन्ही मे कुछ गद्दार सिक्ख इसी कांग्रेस का साथ दे रहे हैं। में नहीं मानता की वो सिक्ख हैं जो देश विरोधी गतिविधियों में कांग्रेस का साथ दे रहे हैं, और rakesh tikait के साथ धरने में बैठे हैं।
ये सरदारों के वेश में गद्दार हैं जो केवल सिक्ख का बाना पहन कर पूरी सिक्ख कोम को बदनाम कर रहे हैं।
वह समय अब दूर नही हैं जब देश की जागरूक जनता इन देशद्रोहियों को इनकी असली औकात बता कर इन्हे इनके सही स्थान पर भेज देगी।
जय हिंद जय भारत🙏🙏🇮🇳🇮🇳

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