श्री रंगम मंदिर|Ancient Aircraft found in Shri Rangam Mandir in India| Gopuram or Aircraft?| Hindi

भारत देश में पिछले हजारों सालों से कई ऐसे दिव्य मंदिर विद्यमान हैं जो प्राचीन भारतीय तकनीक और वैदिक इतिहास को दर्शाते हैं। भारत में लगभग हर राज्य में अलग तरीके से बनाए गए मंदिरों को बहुत ही सुंदर तरीके से बनाया गया हैं। इन मंदिरों के ऊपर बनाई गई नक्कासियो को देख कर यह अनुमान लगाना लगभग मुश्किल हैं की इन नक्काशियों को जिन कारीगरों ने तैयार किया था उन्होंने कोई मशीन प्रयोग में लाई थी या फिर उन्हें हाथो से ही बनाया गया था।

आज के इस लेख में हम बात करने वाले हैं भारत के एक एसे ही रहस्यमई मंदिर श्री रंगम मंदिर के बारे में।
दक्षिण भारत के तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के अंदर यह मंदिर स्तिथ हैं। इस मंदिर की वास्तविक निर्माण तिथि अभी तक कोई भी पता नहीं लगा पाया हैं।
इस मंदिर के अंदर एक पूरा गांव बसा हुआ हैं। यहां पर हर साल हजारों श्रद्धालु भगवान रंग नाथ स्वामी के दर्शन करने देश विदेश से आते हैं।
गोपुरम की द्रविड़ शैली में बना यह मंदिर अत्यंत मनभावक हैं, मुख्यत यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं, जो हिंदुओ के आराध्य देवता हैं।
श्री रंगम मंदिर के अंदर लगभग 14 गोपुरम हैं। माना जाता हैं की इनमे से एक गोपुरम सोने का हैं जो किसी कारीगर के द्वारा बनाया नही गया हैं जबकि स्वयं प्रकट हुआ था।
इस मंदिर के अंदर ऐसी नक्कासिया हैं जो वैज्ञानिकों को भी आश्चर्य में डाल देती हैं। 

Ancient Indian Aircraft in Shrirangam Mandir.

इस खूबसूरत मंदिर के अंदर विमान से संबधित ऐसी नक्कासियां हैं जो किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकती हैं।
अगर एक शोधकर्ता की दृष्टि से इस मंदिर की नक्कासियों को देखा जाए तो हर जगह पर प्राचीन भारतीय तकनीक को दर्शाती हजारों नक्काशिया मन को विचलित कर देगी।
आज से करीबन 8 से 10 साल पहले इस मंदिर के कुछ भाग को श्रद्दालुओ के लिए बंद कर दिया गया था। इस मंदिर के अंदर हजार खम्बो वाला एक बड़ा कमरा हैं जिसके बारे में माना जाता हैं की वह प्राचीन भारतीय विमानों के लिए एक पार्किंग स्थल था।
इस मंदिर की जब वैज्ञानिकों और इतिहासकारों ने जांच की तो पता चला की इस मंदिर के अंदर कुछ तहखाने हैं जिन्हे आज तक नही खोला गया हैं।।सरकार की अनुमति से एक टीम बना कर इस मंदिर के रहस्यों की जांच पड़ताल के लिए भेजी गई। जब वह वैज्ञानिकों का समूह इस भव्य मंदिर के जांच पड़ताल के लिए वहां पहुंचा तो इस मंदिर के रहस्य देख कर हैरत में पड़ गया। श्री रंगम मंदिर के अंदर हर दीवार पर हर गोपुरम में ऐसी नक्काशियां हैं जो प्राचीन भारत की वैदिक तकनीक की भव्यता की दर्शाती हैं।
इस मंदिर के खम्बो के उपर बहुत ही बारिक नक्कासियाँ तराशी गई हैं जिनका संबंध मुख्य रूप से विमानों से हैं।
इस मंदिर के अंदर विमानों के पंखों और उनकी प्राचीन डिजाइन को दिखाया गया हैं इन बारिक कलाकृति के द्वारा।
मंदिर के अंदर कई तहखाने हैं जिनकी खोज के लिए एक वैज्ञानिकों की टुकड़ी अलग से बनाई गई जो केवल इन तहखानों के अंदर क्या हैं इसके बारे में जानने की ज्यादा उत्सुक थी।
इस मंदिर के कुछ तहखानों को जब खोला जा रहा था तो उनमें से कुछ रहस्यमई सुरंग मिली जिनका कोई अंत दिखाई नही दे रहा था और यह सुरंगे बहुत ही विकट थी जिनके अंदर ज्यादा देर तक रुक पाना आज के समय में बिना सुरक्षा उपकरणों के संभव नहीं हैं। 
वैज्ञानिकों के एक समूह ने इस मंदिर के तहखानों के रहस्य को खोजने के लिए अपने दिन रात एक कर दिए। इस मंदिर के अंदर नीचे कुछ तहखानों को खोलने के बाद वैज्ञानिकों को एक तहखाना ऐसा मिला जिसमे कुछ वैज्ञानिक उपकरण अपनी जगह पर कई सालो से रखा हुआ था।
इस उपकरण को डिजाइन एक मंदिर के गोपुरम की तरह थी, यह बिल्कुल वैसी ही डिजाइन थी जो मंदिर के पिल्लरो पर गोपुरम की डिजाइन की गई थी। 

Sone ka Gopuram Kya sach me apne aap prakat hua tha??

मंदिर की पिल्लरो के ऊपर जो बारिक नक्काशी की गई थी उसमे गोपुरम के निचले हिस्से पर किसी विमान के इंजन की तरह की कलाकृति बनाई गई थी। 
जो उपकरण उस तहखाने में मिला वह बिल्कुल उस गोपुरम की तरह जा जो सोने का बना हुआ हैं और इसी मंदिर में बाकी गोपुरम के साथ अपनी भव्यता को कई सालो से दुनियां को दिखा रहा हैं।
जो गोपुरम शुद्ध सोने का बना हुआ हैं उसके हर तरह भगवान विष्णु की मूर्तियां बनाई हुई हैं जिसमे भगवान विष्णु को चतुर्भुज रूप के अंदर दर्शाया गया हैं।
स्थानीय लोगो की माने तो यह गोपुरम भगवान विष्णु का निजी विमान था जो अपने आप इस मंदिर के अंदर आज से हजारों साल पहले प्रगट हो गया था। 
जब उसे तहखाने में मिले उपकरण की जांच करने के लिए वैज्ञानिकों ने उसे छूने की कोशिश की तो उसके अंदर से एक बहुत ही भयानक ध्वनि निकली जिसे सुनकर सारे वैज्ञानिक बहुत ज्यादा डर गए और तहखाने से भाग गए।
यह एक प्राचीन भारतीय तकनीक से बना हुआ विमान था जिसके बारे में भारद्वाज मुनि के विमानशास्त्र के अंदर भी लिखा हुआ हैं।
इस विमान की कलाकृति बिलकुल भारतीय प्राचीन विमानों की तरह थी जो प्रकाश से भी तेज गति से चल सकते थे।
भारतीय वैज्ञानिकों ने इस तहखाने में मिले उस प्राचीन विमान के भयंकर गर्जन करने के बाद वहां से बाहर निकलना ही उचित समझा।
इस घटना के बाद उस मंदिर के तहखानों को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। 
कुछ लोगो का मानना हैं की यह विमान समय के किसी और चक्र में फंसा हुआ हैं और जब इसका उपयोग का सही समय आएगा और इसे उड़ाने के लिए योग्य विमान चालक मिलेगा तो यह विमान वापिस अपने अस्तित्व में आ जायेगा ।
स्थानीय लोगो का कहना हैं की अगर इस विमान के साथ जान बूझ कर छेड़खानी की गई तो यह उसे छूने वाले लोगो और आस पास के लोगों को समय के किसी और चक्र में फंसा देगा जिससे निकलना आज के समय में वैज्ञानिक के बस में नहीं हैं।
इस अप्रतिम खोज को पूरा क्यों नही किया गया?? इस विमान के बारे में अगर सही से शोध किया जाता तो प्राचीन भारतीय तकनीक के बारे में वैज्ञानिक सही से जानकारी प्राप्त कर सकते थे और हो सकता हैं हम अंतरिक्ष विज्ञान के उस पड़ाव को भी पार कर लेते जो आज तक किसी ने भी नही किया हैं।
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