Waqf Board Act Amendment Bill


वक्फ बोर्ड एक्ट संशोधन बिल (Waqf Board Act Amendment Bill)

परिचय

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025, जिसे औपचारिक रूप से “यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (UMEED) एक्ट, 1995” के नाम से जाना जाता है, भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियमन में सुधार लाने के लिए लाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इसे लोकसभा में 2 अप्रैल 2025 को पारित किया गया और यह वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करता है। यह कानून वक्फ बोर्ड की शक्तियों को संतुलित करने, संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने, और डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्रबंधन को आधुनिक बनाने पर केंद्रित है। भारत में वक्फ संपत्तियाँ तीसरी सबसे बड़ी संपत्ति धारक हैं, जिसमें 8.7 लाख संपत्तियाँ और 9.4 लाख एकड़ जमीन शामिल है, जिनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है। इस लेख में हम इस अधिनियम के सभी पहलुओं, इसके लाभों, विवादों, और प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill)

वक्फ क्या है?

वक्फ एक इस्लामिक परंपरा है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को धार्मिक, परोपकारी, या सामुदायिक कल्याण के लिए समर्पित कर देता है। यह संपत्ति अल्लाह की मानी जाती है और इसका उपयोग मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान, या गरीबों की सहायता जैसे कार्यों के लिए किया जाता है। एक बार संपत्ति वक्फ घोषित हो जाए, तो वह अपरिवर्तनीय हो जाती है और उसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। भारत में वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं।


वक्फ बोर्ड संशोधन बिल (Waqf Board Amendment Bill)

1995 के अधिनियम की पृष्ठभूमि

वक्फ अधिनियम 1995 ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक ढांचा प्रदान किया था, लेकिन इसमें कई कमियाँ थीं। वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियाँ प्राप्त थीं, जिसके कारण संपत्तियों पर अतिक्रमण और भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ीं। संपत्तियों का रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा जाता था, और बोर्ड में महिलाओं और गैर-मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व न के बराबर था। इन समस्याओं को देखते हुए संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई।


वक्फ संशोधन बिल इन लोकसभा (Waqf Amendment Bill in Lok Sabha)

लोकसभा में पारित होने की प्रक्रिया

वक्फ संशोधन बिल को पहली बार अगस्त 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया। JPC की सिफारिशों के आधार पर इसे संशोधित किया गया और 2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। 12 घंटे की लंबी बहस के बाद इसे 288-232 मतों से पारित किया गया। सत्तारूढ़ एनडीए ने इसे अल्पसंख्यकों के लिए लाभकारी बताया, जबकि विपक्ष ने इसे “मुस्लिम विरोधी” करार दिया।


वक्फ संशोधन बिल 2025 (Waqf Amendment Bill 2025)

मुख्य प्रावधान

  • नाम में बदलाव: वक्फ अधिनियम 1995 का नाम अब “UMEED एक्ट, 1995” होगा।
  • वक्फ बोर्ड में समावेशिता: बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य और दो मुस्लिम महिलाओं का होना अनिवार्य।
  • संपत्ति पंजीकरण: सभी वक्फ संपत्तियों को 6 महीने के अंदर ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा।
  • वक्फ संपत्ति की पहचान: जिला कलेक्टर को यह तय करने का अधिकार कि कोई संपत्ति वक्फ है या सरकारी।
  • वक्फ ट्रिब्यूनल में सुधार: ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है।

वक्फ बोर्ड संशोधन बिल इन लोकसभा (Waqf Board Amendment Bill in Lok Sabha)

बहस के प्रमुख बिंदु

लोकसभा में बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बिल धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता, बल्कि प्रशासनिक सुधार लाता है। विपक्षी नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे असंवैधानिक बताते हुए बिल की कॉपी फाड़ दी। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने इसे संविधान के मूल ढांचे पर हमला करार दिया।


वक्फ बोर्ड एक्ट में संशोधन (Amendment in Waqf Board Act)

संशोधन के उद्देश्य

  • पारदर्शिता: डिजिटल रिकॉर्ड और ऑडिट से भ्रष्टाचार पर रोक।
  • समावेशिता: महिलाओं और गैर-मुस्लिमों की भागीदारी बढ़ाना।
  • कानूनी स्पष्टता: संपत्ति विवादों को सुलझाने के लिए नई प्रक्रिया।
  • आधुनिकीकरण: तकनीक का उपयोग कर प्रबंधन को बेहतर करना।

वक्फ संशोधन बिल विवाद (Waqf Amendment Bill Controversy)

विवाद के कारण

  • धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल: विपक्ष का कहना है कि गैर-मुस्लिमों को बोर्ड में शामिल करना संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है।
  • संपत्ति हड़पने का डर: लिमिटेशन एक्ट लागू होने से अतिक्रमण करने वाले दावा कर सकते हैं।
  • नए मुस्लिमों का बहिष्कार: 5 साल से इस्लाम का पालन करने वाले ही वक्फ बना सकते हैं।

वक्फ बोर्ड बिल इन पार्लियामेंट (Waqf Board Bill in Parliament)

संसद में चर्चा

बिल को लोकसभा में पारित करने के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया गया। राज्यसभा में भी विपक्ष ने इसे असंवैधानिक करार दिया, जबकि सरकार ने इसे पारदर्शिता और समावेशिता का प्रतीक बताया। एनडीए के पास बहुमत होने के कारण इसे पारित होने की संभावना अधिक है।


वक्फ संशोधन बिल 2024 (Waqf Amendment Bill 2024)

2024 से 2025 तक का सफर

यह बिल पहली बार अगस्त 2024 में पेश हुआ था। JPC ने 66 संशोधनों का सुझाव दिया, जिनमें से 14 को मंजूरी मिली। फरवरी 2025 में कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी, और अप्रैल 2025 में इसे लोकसभा में पारित किया गया।


वक्फ बिल इन पार्लियामेंट (Waqf Bill in Parliament)

राज्यसभा में स्थिति

3 अप्रैल 2025 तक राज्यसभा में इस पर बहस जारी है। विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया, जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे गरीब मुस्लिमों के लिए लाभकारी करार दिया।


वक्फ बोर्ड संशोधन (Waqf Board Amendment)

बोर्ड की संरचना में बदलाव

  • सदस्यों की संख्या: अब बोर्ड में कम से कम तीन सदस्य होंगे, जिसमें दो गैर-मुस्लिम शामिल होंगे।
  • महिला प्रतिनिधित्व: दो मुस्लिम महिलाओं की नियुक्ति अनिवार्य।

वक्फ बिल (Waqf Bill)

कानूनी ढांचा

यह बिल वक्फ अधिनियम 1995 को संशोधित करता है और इसमें 40 से अधिक संशोधन शामिल हैं। यह मुस्सलमान वक्फ एक्ट 1923 को भी निरस्त करता है।


वक्फ एक्ट संशोधन (Waqf Act Amendment)

आर्थिक पारदर्शिता

  • ऑडिट: 1 लाख रुपये से अधिक आय वाली वक्फ संस्थाओं का सरकारी ऑडिट।
  • योगदान में कमी: वक्फ बोर्ड को अनिवार्य योगदान 7% से घटाकर 5%।

वक्फ बोर्ड बिल (Waqf Board Bill)

संपत्ति प्रबंधन

  • कलेक्टर की भूमिका: संपत्ति की पहचान और विवाद सुलझाने में जिला कलेक्टर की अहम भूमिका।
  • ऑनलाइन पंजीकरण: सभी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य।

वक्फ एक्ट इन पार्लियामेंट (Waqf Act in Parliament)

संसदीय समिति की भूमिका

JPC ने 6 महीने तक इस बिल पर चर्चा की और 14 संशोधनों को मंजूरी दी। विपक्ष ने इसे पक्षपातपूर्ण बताया, लेकिन सरकार ने इसे व्यापक परामर्श का परिणाम कहा।


वक्फ संशोधन बिल प्रोटेस्ट (Waqf Amendment Bill Protest)

विरोध प्रदर्शन

  • मुस्लिम संगठन: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इसे मुस्लिम अधिकारों पर हमला बताया।
  • सड़क पर प्रदर्शन: दिल्ली, लखनऊ, और हैदराबाद में विरोध प्रदर्शन हुए।

वक्फ एक्ट संशोधन बिल (Waqf Act Amendment Bill)

निष्कर्ष

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 एक साहसिक कदम है जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी और कुशल बनाने की कोशिश करता है। इसके कई लाभ हैं, जैसे डिजिटलीकरण और समावेशिता, लेकिन इसके कुछ प्रावधान विवादास्पद हैं। सरकार को इसे लागू करने में समुदाय के साथ संवाद और संतुलन बनाना होगा।


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