Sanatan Dharma पीछले हजारों सालों से पूरे संसार में अपने ज्ञान से प्रकाश फैलाता आ रहा हैं। आज से हजारों साल पहले इस पूरे संसार में केवल एक ही धर्म सर्वव्याप्त हुआ करता था और वो हैं हमारा Sanatan Dharma
Sanatan Dharma से संबंधित सबूतों को वामपंथी इतिहासकार और हिंदू विरोधी मानसिकता वाले लोग मिटात आ रहे हैं और उन्हें केवल एक काल्पनिक कहानी सिद्ध करने का प्रयास करते हैं।
जब से इस दुनिया में अन्य धर्मों का उद्गम हुआ हैं उनकी केवल एक ही विचारधारा रही हैं की केसे भी दूसरे धर्म के लोगो को अपने धर्म में सम्मिलित कर के उनकी संख्या को बढ़ाया जाए।
History of Angkor Wat Temple
Sanatan Dharma और सनातन सभ्यता से सरोकार रखने वाला एक हिंदू मंदिर आज भारत से बाहर भी अपनी तरफ देश विदेश के लोगो को अपनी ओर आकर्षित करता हैं।
भारत से कई किलोमीटर दूर एक देश हैं Combodia इस देश के अंदर दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर हैं। जिसे Angkor Wat Temple के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती हैं। पांच मंदिर शिखर वाला यह मंदिर आज भी अपनी भव्यता से प्राचीन हिंदू सभ्यता के सबसे उत्तम होने के सबूतों को अपने अंदर समेटे हुए दुनिया को हिंदू प्राचीन तकनीक का उदाहरण दिखाता हैं।
Temple of Angkor Wat के अंदर एसे कई रहस्य दफन हैं जो आज तक वैज्ञानिकों के समझ से बाहर हैं।
इस मंदिर को आज कई लोग बौद्ध धर्म का मंदिर भी मानते हैं परंतु यह बिल्कल गलत हैं, यह एक हिंदू मंदिर हैं और इसके सबूत यह मंदिर खुद ही देता हैं।
इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यबर्मन ने करवाया था। आज के समय में इस मंदिर के मुख्य कक्ष के अंदर भगवान बुद्ध की खड़े हुए मूर्ति हैं, यह मूर्ति एक हिंदू मंदिर में कहां से आई??
क्या यह वास्तव में इस मंदिर का मुख्य कक्ष हैं??
जब इस मंदिर के अंदर आप प्रवेश करोगे तो भगवान विष्णु की एक प्रतिमा आपको मंदिर के बाहरी क्षेत्र में मिलेगी, इतिहासकारों और वैज्ञानिकों की माने तो इस मंदिर का निर्माण कब राजा सूर्यबर्मन ने करवाया था तब यह एक हिंदू मंदिर ही था लेकिन राजा सूर्यदेव की मृत्यु के बाद में जब उनका पुत्र राजगद्दी पर बैठा तो उसने हिंदू धर्म को त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लिया था।।
अपने पिता द्वारा बनाए गए Hindu Temple of Angkor wat को उसने एक बौद्ध मंदिर में बदलने की अधूरी कोशिश की परंतु जो कभी सफल नहीं हो पाई।
इस मंदिर के मुख्य कक्ष के बारे में शोध कर्ताओ का कहना हैं कि इस मंदिर के वास्तविक मुख्य गर्भ गृह को चारो तरफ से राजा सूर्यबर्मन के बेटे ने बंद करवा दिया था और उसके बाद उसकी चारो दीवारों पर गौतम बुद्ध की मूर्तियां लगवा दी थी।
इस मंदिर के गर्भ गृह में जो भगवान विष्णु की प्रतिमा थी उसे मंदिर के बाहर रखवा दिया था।
इस मंदिर के ऊपर कई वैज्ञानिकों ने शोध किए हैं और हर शोध का परिणाम यही निकला हैं की यह एक पुरातन हिंदू सभ्यता को दर्शाने वाला भगवान विष्णु का मंदिर हैं जिसे कालांतर में बदल दिया गया।
Angkor Wat Temple के अंदर जो सुंदर बारिक नक्काशी की गई हैं उनमें हिंदू धर्म में प्रचलित कुछ घटनाओं को दर्शाया गया हैं।
Solar Energy Technology Founded in Angkor Wat Temple
वैज्ञानिकों और इतिहासकारों ने जब इस मंदिर पर शोध किए तो उन्हे एक चौंकाने वाली तकनीक इस मंदिर में मिली जो आज से हजारों साल पहले पुरातन भारतीय वैज्ञानिकों के द्वारा बनाई गई थीं । इस तकनीक का उपयोग आज पूरी दुनिया कर रही हैं जिसे सौर ऊर्जा कहा जाता हैं।
इस मंदिर को धरती से देखने से इसके पूरे रहस्य का पता नही लग पता हैं। वैज्ञानिकों ने जब इस मंदिर को आसमान से देखा तो उन्हें मुख्य गुंबद के अंदर एक 3 फीट का गोलाकार छेद मिला जो मंदिर के अंदर गहराई में जाता था।
इस गोलाकार छेद की जब विस्तार से जांच की गई तो पता चला की या गोलाकार छिद्र गुंबद से होते हुए मंदिर के गर्भगृह के ठीक नीचे बने हुए एक तहखाने में जाता हैं।
इस तथ्य को जांचने के लिए जब मंदिर के गर्भ गृह के नीचे बने तहखाने को खोला गया तो वैज्ञानिकों को वहां एसे सबूत मिले जिनसे यह साबित होता था की इस मंदिर के नीचे जो तहखाना हैं वहां पर मंदिर के निर्माण समय से एक पत्थर का बड़ा बक्सा रखा हुआ था जो सीधे उस गोलाकार छेद के नीचे था जो मंदिर के मुख्य गुंबद से होता हुआ आ रहा था।
कालांतर में किसी आक्रांता या वामपंथी इतिहासकारों ने उस बक्से को वहां से चुराकर हटा दिया था।
वैज्ञानिकों ने इस मंदिर के आस पास बने कुछ और हिंदू मंदिरों की जब जांच की तो उन्हे Angkor Wat Temple से 2 मील की दूरी पर एक मंदिर में वैसा ही एक बक्सा मिला जिसके सबूत Angkor Wat Temple के उस तहखाने से मिले थे।
इस बक्से के ऊपर की तरफ एक वही 3 फ़ीट का गोलाकार छेद मिला जैसा मंदिर के मुख्य गुंबद के अंदर नीचे तहखाने तक बना हुआ था।
इस बक्से का वैज्ञानिकों द्वारा जब शोधन किया गया तो पता चला की इस बक्से के अंदर सिलिकॉन के कुछ छोटे अवशेष मिले थे और एसे ही कुछ और पुरातन अवशेष मिले थे जिनसे यह साबित होता था की यह बक्सा कोई साधारण बक्सा नही था जबकि ऊर्जा संरक्षित करने का एक यंत्र था।
Angkor Wat Temple के मुख्य गुंबद के अंदर जो गोलाकार छेद बना हुआ था उसके द्वारा सूर्य की किरणे सीधे मंदिर के तहखाने में स्थापित इस बक्से के अंदर जाति थी जो सौर ऊर्जा का संरक्षण करती थी।
इस मंदिर के अंदर दीवारों पर की गति नक्काशियों में रामायण के कुछ दृश्य को उकेरा गया था जिससे यह साबित होता हैं की रामायण कोई काल्पनिक कथा नही बल्कि एक सनातन सत्य हैं।
इस मंदिर के जैसा कोई दूसरा मंदिर आज तक दुनिया में नहीं बनाया गया हैं।यह अपनी तरह का एकमात्र हिंदू मंदिर हैं जो आज भी अपनी भव्यता से लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करता हैं।
शोधकर्ताओं ने अपने शोध से बताया की जो बुद्ध की मूर्तियां मंदिर के मुख्य गर्भ गृह के अंदर बनाई गई हैं वह वास्तविकता में मंदिर के निर्माण के कई सालो बाद बनाई गई हैं।
उन बुद्ध प्रतिमा और मंदिर की वास्तविक निर्माण शैली में जमीन आसमान का फर्क हैं।
इन प्रतिमाओं को मुख्य गर्भ गृह के रहस्य को छुपाने के लिए और इसे एक बौद्ध मंदिर साबित करने के लिए बनाया गया था।
इस मंदिर के कई रहस्य एसे हैं जो आज भी अज्ञात हैं।
क्या आज के समय में मशीन और तकनीक के साथ एसे किसी मंदिर का निर्माण किया जा सकता हैं??
आज के समय की तकनीक उतनी उन्नत नही हैं जो प्राचीन भारतीयों के पास थी। आज से हजारों साल पहले केसे इन कारीगरों ने एसे विशाल मंदिर का निर्माण किया था??
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Sanatan dharm se bada dharm koi nahi bas murkh banane ke liye jo bhi huaa