Konark Sun Temple| कोणार्क सूर्य मंदिर का वास्तविक इतिहास|Suryadev Temple|Hindi|Konark Temple Mystery|Sun Temple Information

Konark Sun Temple 

भारत की प्राचीन कारीगरी और स्थापत्य कला के नमूने आज पूरे संसार में जगह जगह पर मिल रहे हैं। भारतीय पुरातन कारीगरों द्वारा बनाए गए एक अनोखे नमूने को आज दुनिया Konark Mandir के नाम से जानती हैं। इस मंदिर के बारे में कई मान्यताएं हैं। इस मंदिर के निर्माण के बारे में आज तक किसी को भी विस्तृत रूप से नही पता हैं। इस मंदिर की दीवारों पर जो अदभुत नक्काशी की गई हैं वह Tourists को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं।

 

आज के इस लेख में हम Konark Sun Temple के बारे में विस्तृत रूप से बात करने वाले हैं।
Konark Sun Temple भारत के राज्य Odisha के Jagannath Puri के पास में Konark नामक जगह पर स्तिथ हैं। कुछ साल पहले इस मंदिर को UNESCO ने World Heritage के रूप में मान्यता दी थी। इस मंदिर के निर्माण की कहानी भगवान Shri Krishna जी से जुड़ी हुई है। पुरातन ग्रंथो के अनुसार भगवान Shri Krishna के पुत्र सांब को कोढ़ रोग हो गया था। इस रोग से निदान पाने के लिए सांब ने मित्रवन नामक पुरातन जगह पर चंद्रभागा नदी के किनारे पर सागर संगम में भगवान सूर्य देव की 12 वर्ष तक तपस्या की थी। भगवान सूर्य देव के आशीर्वाद से सांब को कोढ़ रोग से छुटकारा मिल गया था। कोढ़ से निदान पाने के बाद में एक बार चंद्रभागा नदी में स्नान करते समय सांब को सूर्य देव की एक मूर्ति नदी में मिली, इस मूर्ति को सांब ने मित्रवन में एक मंदिर में स्थापित कर दिया था।
प्राचीन हिंदू धार्मिक ग्रंथों की माने तो इस मूर्ति का निर्माण देव शिल्पी विश्वकर्मा जी ने भगवान सूर्यदेव के शरीर के ही भाग से किया था।

History of Konark Sun Temple

कोणार्क शब्द दो शब्दो से मिल कर बना हुआ हैं
कोण” और “अर्क
कोण का अर्थ किनारे के लिए किया गया हैं जबकि अर्क का संस्कृत में मतलब सूर्य होता हैं।
इस मंदिर का निर्माण कलिंग शैली में किया गया हैं। इस मंदिर के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर ओर काले ग्रेनाइट का उपयोग किया गया हैं।
इस मंदिर के अगर वास्तविक इतिहास को जाना जाए तो प्राचीन पुस्तकों और पांडुलिपियों में लिखा हुआ हैं की इस मंदिर के अंदर पहले तीन मंडप हुआ करते थे जिनमें से 2 मंडप अब ध्वस्त हो चुके हैं। तीसरे मंडप को अंग्रेज सरकार ने उसके मुख्य दरवाजों को हमेशा के लिए चिनायीं करवा कर बंद करवा दिया था। इस मंदिर के मुख्य गुंबद के ऊपर एक चुम्बकीय शीला रखी हुई थीं। इस शिला के बारे में कहा जाता हैं की यह कोणार्क के समुद्र में आने वाले जहाजों को अपनी तरफ आकर्षित करती थीं और जहाज बिना किसी के चलाए ही इस मंदिर की ओर आने लगते एक और क्षतिग्रस्त हो जाते थे। 
कालांतर में इस शिला को मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़ दिया या चुरा लिया जिसके बाद इस मंदिर का कुछ हिस्सा ध्वस्त हो गया था।
Konark Sun 🌞 Temple के मुख्य द्वार पर दो सिंह हाथी की मूर्तियां बनी हुई हैं। यह मूर्तियां आक्रामक रूप में रक्षा की स्तिथि में हैं।यह दोनो मूर्तियां एक आदमी के ऊपर बनी हुई हैं और इन मूर्तियों को एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया हैं।
ऐतिहासिक दस्तावेज की माने तो इस मंदिर का निर्माण 1250 में हुआ था। इस मंदिर का महत्व धार्मिक और वैज्ञानिक दोनो रूप में हैं।
इस मंदिर के अंदर पत्थरों पर की गई नक्काशियों में प्राचीन भारतीय राजाओं के राज चलाने के दृश्य तक को दर्शाया गया हैं। इस मंदिर को एक रथ के आकार में बनाया गया हैं।
प्राचीन भारतीय धार्मिक ग्रंथों में लिखा हुआ है कि सूर्य देव अपने रथ पर आसमान में भ्रमण करते हैं।
 सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक की एक निश्चित सीमा होती है । सूर्य देव के रथ में सात घोड़े जूते हुए होते हैं। इन घोड़ों को सूर्य देव की प्रकाश की रोशनी का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में लिखा हुआ है कि सूर्य देव के रथ में जूते हुए सात घोड़े इंद्रधनुष के सात रंगों  के प्रतीक हैं। इस मंदिर का जिस रथ के रूप में  निर्माण किया गया है उसमें भी साथ घोड़े जुते हुए थे जिनमें से अब एक घोड़ा ही सही सलामत बचा है, बाकी छह घोड़ों को मुस्लिम आक्रांताओ ने तोड़ दिया था।
 इस मंदिर को भी तोड़ने के लिए कई बार आक्रमण हुए हैं और इसके काफी हिस्से को तोड़ भी डाला गया था। आज कोणार्क के सूर्य मंदिर की जो संरचना हम देखते हैं वह इस मंदिर के मुख्य संरचना नहीं है।
 Konark Sun Temple की मुख्य संरचना को मुस्लिम आक्रांताओ ने तोड़ दिया था, वर्तमान संरचना मुख्य संरचना के आगे बनी हुई थी। इस मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशियों के अंदर बहुत ही बारिक ज्ञान को प्रदर्शित किया गया है, जिसे अगर आप एक शोधकर्ता की दृष्टि से देखेंगे तो आपको मालूम होगा कि इस मंदिर की दीवारों में युद्ध कौशल, दंड व्यवस्था प्राचीन भारत के अंदर लोग किस प्रकार से जीवन यापन करते थे, इसको इस मंदिर की दीवारों पर नक्काशीयों के रूप में दर्शाया गया है।

Konark Sun Temple Mystery

 प्राचीन भारतीय राजाओं के विदेशी राजाओं से कैसे संबंध होते थे इसके बारे में भी इस मंदिर की दीवारों पर बने नक्काशीयों के अंदर दर्शाया गया है।
 एक नक्काशी के अंदर भारतीय राजा और अफ्रीकी राजाओं के मिलन के दृश्य को दिखाया गया है। जिसके अंदर भारतीय राजा हाथी के साथ और अफ्रीकी राजा जीराफ के साथ एक दूसरे के साथ मिल रहे हैं। हाथी और जिराफ एक दूसरे को मिलने पर भेंट या उपहार दिया जाने का प्रतीक हैं।
आधुनिक इतिहासकारों की मानें तो अफ्रीका के जंगलों में कभी भी जिराफ नहीं हुआ करते थे इससे यह पता चलता है कि यह मंदिर बहुत पुराना है। यह मंदिर उस समय का है जब पूरी धरती एक सीधी लाइन में हुआ करती थी, आज की तरह धरती विघटित संरचना में नहीं थी।
 इस मंदिर की दीवारों पर ग्रीक और चीन के राजाओं के साथ भी भारतीय राजाओं के मिलन के दृश्य को दिखाया गया है। इस मंदिर के अंदर बच्चे स्त्री और वयस्क पुरुष के ज्ञान के लिए बहुत सी चीजें हैं।
Konark Sun Temple को अगर उन्हें ध्यान से देखा जाए तो सबसे नीचे के भाग में बहुत से जानवरों की नक्काशी की गई है जो शायद बच्चों को बहुत पसंद होती है। बच्चे इनको बहुत खुश भी होते हैं। महिलाओं के लिए इस मंदिर की दीवारों पर सौंदर्य कला का विस्तृत रूप दर्शाया गया है की प्राचीन काल में कैसे Fashion अपने अस्तित्व में हुआ करती थी, बालों को सजाने से लेकर ऊंची एड़ी वाली चप्पलों को  ईस मंदिर की नक्काशी में दर्शाया गया है।
 कोणार्क के मंदिर में यौन शिक्षा को भी विस्तार से बताया गया है। यौन शिक्षा के अंदर संभोग की स्थितियों के अलावा भी काफी सारे ज्ञान को नक्काशी के द्वारा प्रदर्शित किया गया है, जिसे अगर एक शोधकर्ता की दृष्टि से देखा जाए तो आप प्राचीन भारतीय कारीगरी के ज्ञान और प्राचीन भारतीय लोगों के अंदर जो ज्ञान हुआ करता था उसके बारे में अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कितने विकसित हुआ करते थे।
 इस मंदिर के अंदर एक नक्काशी में  एक बच्चे को जन्म देने के बाद स्त्री को आग के ऊपर खड़े हुए दिखाया गया हैं जो एक चिकित्सा पद्धति का हिस्सा है। इसके अनुसार बच्चे के जन्म के बाद औरतों की योनि में होने वाले संक्रमण से बचने के लिए इस विधि का सहारा लिया जाता था।
 आज भी उड़ीसा में रहने वाली बांडा आदिवासी सभ्यता के लोग इस तरीके को अपनाए हुए हैं, आज भी बांडा समुदाय की औरतें बच्चे को जन्म देने के बाद में नीम की लकड़ियों को जलाकर उनके ऊपर खड़ी होकर अपने आपको होने वाले संक्रमण से बचाती हैं और फिर तुरंत काम करने लग जाती हैं।

Scientific Explanation of Sun Temple at Konark

 Konark Sun Temple के अंदर देवताओं की अनेक मूर्तियों को बनाया गया है और हर एक देवता की जो मूर्ति बनाई गई है उनको विस्तृत रूप में दर्शाया गया है।
 यह मंदिर Newton से बहुत साल पहले का बना हुआ है। Newton ने 1639 के आसपास में बताया था कि सूर्य की किरने सफेद नहीं होती है, जबकि सात रंगों से मिलकर बनी होती है।
 इस मंदिर के अंदर बने हुए जो 7 घोड़े हैं जिन्हें सूर्य के प्रकाश किरणों का प्रतीक माना जाता है, माना जाता है कि वह सारे घोड़े इंद्रधनुष के सात रंगों में अलग-अलग रंगे हुए थे जिसे बाद में मुस्लिम आक्रांता ने ध्वस्त कर दिया था।
 Konark Sun Temple के बारे में मान्यता हैं कि अगर कोई दंपति निसंतान है, और उसे संतान की आशा है तो कोणार्क के सूर्य मंदिर की लगातार 21 दिन तक सुबह शाम दोनों समय परिक्रमा करके पूजा करने से निसंतान दंपति को भी संतान प्राप्ति हो जाती है।
 इसलिए इस मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत अधिक हो जाता है। इस मंदिर के अंदर भगवान सूर्य देव की तीन मूर्तियां बनी हुई है। यह मूर्तियां भगवान सूर्यदेव की बाल्यावस्था, युवावस्था और प्रौढ़ावस्था को दिखाती है।
 इन तीनों मूर्तियों के माध्यम से प्राचीन कारीगरों ने सूर्योदय दोपहर और सूर्यास्त को दर्शाया है। मुस्लिम आक्रांताओ के आक्रमण के समय में मंदिर के पुजारियों ने मुख्य मूर्ति को रेत के अंदर छुपा दिया था, माना जाता है कि जो इस मंदिर की मुख्य मूर्ति थी वह आज दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखी हुई भगवान सूर्य देव की मूर्ति है।
 सूर्य देव को स्थानीय लोग बिरंचि नारायण के रूप में भी जानते थे जो भगवान सूर्य देव का स्थानीय आदिवासियों और स्थानीय लोगों की नजरो में धार्मिक नाम था।
 इस मंदिर के अंदर 12 जोड़ी चक्र बने हुए हैं और हर एक चक्र में 8 अरे बने हुए हैं। हर एक अरा एक प्रहर का प्रतीक है और आठ अरे दिन के आठों प्रहर के प्रतीक है।
 यह चक्र समय को दर्शाते हैं। इन चक्रों के माध्यम से समय गणना की जा सकती है। प्राचीन भारतीय  कारीगरों ने किस तकनीक का प्रयोग इन मंदिरों को बनाने के लिए किया था?? यह आज भी दुनिया के लिए अनजान है, आज तक कई वैज्ञानिकों ने इस मंदिर के ऊपर शोध किए हैं परंतु कोई भी इसकी वास्तविक निर्माण तिथि को नहीं बता पाया है।
 इस मंदिर के अंदर भी कई रहस्य दफन है जो आज तक हमारे ज्ञान से बहुत दूर हैं।
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