भारत के विभाजन का जिम्मेदार कोन हैं, इस बारे में जब भी कोई बात होती हैं तो लोगो के इस बारे में अलग अलग मत होते हैं।
Who is Responsible for Participation of india in 1947??
आज के इस लेख में हम बात करने वाले हैं,भारत के विभाजन के बारे में। क्या आप जानते हैं भारत के विभाजन के समय में लाखो बेकसूर लोगो ने अपनी जान गंवा दी थी??
रातों रात एक रेखा खेंचकर हमारी भूमि को से हिस्सो मे बांट दिया गया।
भारत का एक बहुत बड़ा हिस्सा अंग्रेजी हुकूमत को ही विभाजन का जिम्मेदार मानता हैं, परंतु वास्तविकता में हकीकत कुछ और ही हैं।
भारत में कुछ जयचंद रूपी अंग्रेज हुकूमत में चमचे थे जिन्होंने खाया तो इस देश का परंतु हमेशा गुणगान गए अंग्रेजी हुकूमत के।
भारत की आम जनता को इतना ज्यादा मूर्ख बनाया गया की जिसकी कोई हद नही हैं। देश को विभाजित करने का कार्य पर्दे के पीछे छुप कर किया और जनता के सामने सबसे बड़े देशभक्त बने रहे।
महात्मा गांधी ओर जवाहरलाल नेहरू ये दो इंसान वास्तविक में अपने तीसरे साथी जिन्ना के साथ इस विभाजन के वास्तविक जिम्मेदार थे। ये तो पूरी दुनिया जानती हैं कि जब द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय सेनाओं से अंग्रेजी हुकूमत की तरफ से युद्ध लड़ने के लिए कहा गया, अंग्रेजी हुकूमत की शर्त ये थी की अगर भारतीय सैनिक विश्व युद्ध में अंग्रेजी हुकूमत की तरफ से हिस्सा लेते हैं । इस युद्ध के बाद भारत से अंग्रेजी हुकूमत निकल जायेगी। भारत एक आज़ाद देश बन जाएगा।
Who Divided hindu and muslim in British India??
भारत के विभाजन होने के कई सालो पहले से ही देश के अंदर हिंदू मुसलमानो के बीच दंगे फैलाने की साजिशे शुरू हो चुकी थी। गांधी जी ने हमेशा मुसलमानो का पक्ष लिया।
एक बार की बात हैं किसी अनजान लेखक ने एक पुस्तक निकली जिसमे हिंदू देवी देवताओं के अश्लील चित्रण किए गए थे, और हिंदू धर्म को बहुत ज्यादा अपमानित किया गया था इस पुस्तक के माध्यम से।
यह पुस्तक बाजार में खूब बिकी थी, इस पुस्तक की हजारों प्रतियां देश भर के अंदर फैल गई थी।
देश के हिंदुओ में मुसलमानो के प्रति बहुत गुस्सा भर गया था। कुछ जागृत हिंदू संगठन विरोधियों को मुंह तोड़ जवाब देने वाले थे। गांधी तक जब यह बात गई तो उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी बता कर हिंदुओ से कोई भी कार्यवाही न करने की अपील की।
गांधी जी के द्वारा इस मामले को दबाए जाने से आहत हुए एक हिंदू लेखक ने फिर एक पुस्तक बाजार में निकाली, यह पुस्तक इस्लाम धर्म की कमजोरियों को सबूतों के साथ पेश कर रही थी। इस्लाम धर्म के अंदर क्या गलत हैं यह बकायदा आयत नंबर के साथ प्रकाशित की गई थी। भारत के अंदर इस पुस्तक की भी खूब प्रतियां बिकी थी।
इस्लाम की कमजोरियों को उजागर करने वाली यह पुस्तक जंगल में आग की तरह फैल गई थी। इस पुस्तक के अंदर इस्लाम धर्म के उन तथ्यों को उजागर किया गया था, जिसके कारण हजारों लोगों की जिंदगी खराब हो जाती है।
Who killed mahatma gandhi??
जब यह पुस्तक देश के मुसलमानों के बीच पहुंची तो इसके ऊपर बहुत बड़ा दंगा हुआ। गांधीजी तक जब यह बात पहुंची कि ऐसी कोई पुस्तक बाजार में मौजूद है, जिसमें इस्लाम की कमियों को उजागर किया गया है तो गांधी ने तुरंत प्रभाव से इस पुस्तक के प्रकाशन को बंद करवा दिया और एक साप्ताहिक समाचार पत्र में एक बहुत बड़ा सा लेख दिया जिसके अंदर इस पुस्तक लिखने वाले को बहुत ही ज्यादा कोसा गया, मुसलमानों से गांधी ने खुलेआम उस लेख के माध्यम से दंगे भड़काने के लिए कहा।
गांधी ने कहा कि “मुसलमानों को इसका जवाब खुद देना चाहिए”
गांधी के इतना कहने के ही देरी थी, इसके बाद देश के अंदर दंगे फैल गए और हजारों लोगों ने इन दंगों के अंदर अपनी जान गंवा दी।
महात्मा गांधी ने लाखों हिंदुओं की जान ली है और हिंदुस्तान का हमेशा विनाश ही किया है। मुसलमानो और पाकिस्तान की गांधी ने हमेशा मदद की थी।
महात्मा गांधी की हत्या के केस में नाथूराम गोडसे को न्यायालय में लाया गया और उसके पक्ष को वहां पर जज के द्वारा सुना गया।
क्या आप जानते हैं नाथूराम गोडसे के कोर्ट में दिए गए बयान को भारत में नेहरू सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था, अगर वह बयान उस समय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से आम जनता तक पहुंच जाता तो कांग्रेस की सरकार गिर जाती। जवाहरलाल नेहरू को सत्ता से हाथ धोना पड़ता।
Nathuram godse, Why I killed gandhi??
नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की नीतियों इनके विचारों पर विरोध किया था, वह भी बहुत ही बारिक तरीके से उन्होंने गांधी की उन कमियों को उजागर किया, उन कमियों को न्यायालय को बताया जिसके कारण देश के हिंदुओं में अशांति का माहौल पैदा हो गया था, डर से हिंदुओं का जीना खराब हो गया था।
Nathuram godse last speech
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जब अंग्रेजी हुकूमत ने अपने वादे के अनुसार भारत को एक आजाद देश घोषित कर भारत से निकलने के बारे में कांग्रेस और बाकी पार्टियों को अवगत कराया तो अब सत्ता के लालच के लिए देश के अंदर अलग ही राजनीति चल रही थी।
कांग्रेस का एक अधिवेशन बुलाया गया था जिसके अंदर इस मुद्दे पर बहुत विचार विमर्श किए गए। नेहरू गांधी और जिन्ना के बीच एक बंद कमरे में काफी समय तक मुलाकात हुई और उसी मुलाकात का नतीजा था भारत का विभाजन।
नेहरू भी प्रधानमंत्री बनना चाहते थे और जिन्ना भी प्रधानमंत्री बनना चाहते थे, गांधी के यह दोनों ही प्रिय थे। उस समय गांधी जी का दबदबा पूरे भारत में था। भारत की जनता गांधी जी की बातों को आंख मूंदकर मानती थी। भारत के हिंदू भी गांधी जी को भगवान राम का ही अवतार मानते थे परंतु उन्हें क्या पता था कि वह राम नहीं रावण थे, जिन्होंने हमेशा ही हिंदुओं का विनाश किया।
विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर हिंदू दिल्ली की जामा मस्जिद के अंदर शरण ले रहे थे या फिर दिल्ली की अन्य मस्जुदो में अस्थाई रूप से रुके थे। उन्हें महात्मा गांधी ने वहां से बाहर निकलवा दिया था यह कह कर कि मस्जिदों पर हक सिर्फ मुसलमानों का है।
आप लोग चाहे रास्तों पर सोए पर मस्जिदों में ना जाए।
इसके विपरीत पाकिस्तान के अंदर हिंदुओं की संपतियों को लूट लिया गया। हिंदू औरतों और बच्चों से बलात्कार किए गए, औरतों को नंगी करके उनके स्तन काट दिए गए।
पति और बच्चों के सामने औरतों का बलात्कार किया गया। हजारों लाखों हिंदुओं को मार डाला गया, फिर भी गांधी ने उस बात के ऊपर कोई भी आवाज नहीं उठाई।
कांग्रेस के अधिवेशन में सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाना बहुमत से तय हुआ था। महात्मा गांधी और नेहरू की इस जोड़ी ने ऐसा राजनीतिक खेल खेला कि, सरदार पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया, जबकि उनकी जगह अंग्रेजों के चमचे जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया।
एक क्रांतिकारी का केस है। उस क्रांतिकारी का नाम लेना नहीं चाहूंगा, आप खुद भी इस केस के बारे में कहीं पर भी रिसर्च कर सकते हैं, पूरी जानकारी नेट से पता कर सकते हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले एक क्रांतिकारी को न्यायलय ने हत्या की सजा के रूप में फांसी सुनाई थी।
क्या आप जानते हैं अंग्रेज हुकूमत की तरफ से उस क्रांतिकारी के खिलाफ ब्रिटिश सरकार का वकील कौन था?? यही जवाहरलाल नेहरू थे।
आज जब कांग्रेसी नेता और गांधी परिवार सरदार पटेल को ब्रिटिश सरकार का एजेंट बताते हैं, तो इनको जरा भी शर्म नहीं आती है।
क्या यह अपने परिवार के इतिहास के बारे में जानते हैं?? जवाहरलाल नेहरू ने ब्रिटिश महारानी के हमेशा तलवे चाटे और आज वही कहानी कांग्रेस के अंदर चल रही है।
जहां सारे कांग्रेसी सोनिया गांधी के तलवे चाटते हैं और देश के विकास का पैसा सोनिया गांधी के निजी हाथों में जाता है।
मोहम्मद अली जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू इन दोनों को ही प्रधानमंत्री बनना था।
एक देश के अंदर दो प्रधानमंत्री तो बन नहीं सकते थे, इसलिए हिंदुओं और मुसलमानों को दो अलग-अलग देशों में बांटने की बात कही गई।
Participation of india
एक दिन अचानक से यही घोषणा की गई जिसमें यह कहा गया कि आज से भारत को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। जो मुसलमान पाकिस्तान में जाकर रहना चाहते हैं वह वहां रहे, पाकिस्तान मुसलमानों का देश है। भारत आज से हिंदुओं का देश है।
पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भारत के अंदर आ सकते हैं और हिंदुस्तान में रहने वाले मुसलमान पाकिस्तान के अंदर जा सकते हैं।
मुसलमानों के लिए एक नया अलग देश बना जिसका नाम रखा गया पाकिस्तान और इस देश की नींव रखी थी जवाहरलाल नेहरू मोहम्मद अली जिन्ना और महात्मा गांधी ने।
मोहम्मद अली जिन्ना इस देश के पहले प्रधानमंत्री बनाए गए और भारत का इतिहास इन तीनों की राजनीति के चक्कर में कहीं खो सा गया। जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने और वह हैदराबाद रियासत को पाकिस्तान के अंदर देने के लिए राजी भी हो गए थे।
यह तो सरदार पटेल ही थे, जिन्होंने हैदराबाद के नवाब को पाकिस्तान में मिलने से रोका था नहीं तो आज भारत का एक बीच का हिस्सा हमेशा हम से कटा हुआ होता।
महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू इन लोगों ने ऐसी कौन सी संजीवनी बूटी ले रखी थी??
जिसके कारण अंग्रेजी हुकूमत ने कभी एक लाठी तक नहीं मारी, जबकि बाकी सभी क्रांतिकारियों को मौत के घाट उतार दिया था।
भगत सिंह को फांसी हुई थी। उसकी फांसी रोकने के लिए अंग्रेज सरकार ने एक शर्त रखी थी कि अगर महात्मा गांधी इस बात के लिए हां कर दे,की भगत सिंह को फांसी नहीं देनी चाहिए, तो यह लोग भगत सिंह को फांसी नहीं देंगे परंतु महात्मा गांधी ने भगत सिंह के द्वारा किए गए वीरता पूर्ण कार्य को हिंसा का नाम देकर उसकी मदद ना करने का निर्णय लिया और कहा कि हिंसा करने वाले को तो सजा मिलनी चाहिए।
Mahatma Gandhi on geeta
ऐसी बातें करने के साथ यह हिंदू धर्म का संदर्भ देते थे। हिंदू धर्म कभी कायरता नहीं सिखाता। श्री कृष्ण ने गीता के अंदर साफ-साफ कहा है अधर्म के खिलाफ हथियार उठाना ही पड़ेगा तभी तो अर्जुन ने अपने ही परिवार के लोग, जो अधर्मी थे उनके खिलाफ खिलाफ अपना धनुष उठाया था।
महात्मा गांधी ने गीता का एक अपना अलग ही मतलब निकाल लिया और उसी मतलब से दुनिया को मूर्ख बनाते रहे और भारत के भाग्य विधाता बन बैठे।
जिन्हें बाद में कांग्रेस ने उनकी चमचागिरी के कारण राष्ट्रपिता का दर्जा दे दिया। इस राष्ट्रपिता के द्वारा अपने इस पुत्र भारत को दिए गए घाव को आज भी भारत के बच्चे भोग रहे हैं।
इन्होंने हमारी छाती पर एक ऐसा सांप रख दिया है जो कभी भी हमें काट खाता है, और इस सांप का दंश और जहर हम इतना झेल चुके हैं कि अब यह बर्दाश्त के बाहर हो चुका है।
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