Tajmahal kisne banwaya tha??/Tajmahal का इतिहास/Hindi/#tejomahalay

भारत में स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने जगह जगह पर मौजूद हैं परंतु फिर भी केवल ताजमहल का ही गुणगान ज्यादा किया जाता हैं।

Tajmahal kahan hain??

ताजमहल उत्तरप्रदेश के आगरा शहर में विद्यमान हैं। यमुना नदी के किनारे पर बनी इस इमारत की सुंदरता चांदनी रात की चांदनी में लाख गुना बढ़ जाती हैं।

ताजमहल की वास्तविकता क्या हैं क्या आप जानते हैं?? 
ताजमहल किसने बनवाया??
ताजमहल का वास्तविक नाम तेजो महालय था। इसका निर्माण इतिहास के अनुसार 900 वि शताब्दी के आस पास हुआ था। तेजो महालय भारत में रहने वाले हिंदुओ की आस्था का मुख्य केंद्र था। तेजो महालय जयपुर राजघराने के अंतर्गत आने वाला एक उद्यान था जिसमे बच्चो को संगीत की शिक्षा भी दी जाती थी। आज भी ताजमहल की अंदर की दीवार चीख चीख कर कहती हैं की ये कोई मुगल सम्राट शाहजहां (Shah Jahan) द्वारा बनाया गया मकबरा नही जबकि भारत के गौरवशाली स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना तेजो महालय है।

 tajmahal kisne banwaya thaTajmahal History??

ताजमहल पर कई शोधकर्ताओं ने अपने शोध किए हैं और उनका एक ही निष्कर्ष निकाला हैं की यह कोई मकबरा नही जबकि एक शिव मंदिर हैं। जिसे शाहजहां ने अपना नाम दे दिया। 
अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक खोज कहती हैं की ताजमहल के अंदर कोई मृत शरीर दफन नही हैं। किसी मृत शरीर को अगर संगमरमर के अंदर हजारों साल भी रखा जाए तो उसकी हड्डियां जो मुख्यत फॉस्फोरस रसायन से बनी होती हैं, वह हजारों साल तक नष्ट नहीं हो सकती।

क्या कारण हैं की ताजमहल में किसी भी शरीर के दफनाए जाने के अवशेष नही मिले??

अगर किसी शरीर को उसमे दफनाया जाता तो ही अवशेष मिलते न, इसके अंदर कोई मकबरा नही बल्कि भगवान शिव का प्राचीन काल शिव मंदिर हैं।
Tajmahal जयपुर राजघराने की संपति हुआ करता था किसी समय में यह विशाल शिव मंदिर जिसे बाद में जयपुर महाराजा ने अकबर को भेंट स्वरूप दे दिया था। 
अकबर के जाने के बाद जब जहांगीर के बेटे शाहजहां (shahjahan) ने दिल्ली की गद्दी संभाली तो उसने हिंदुओ पर अपने अत्याचार करने शुरू कर दिया।

Kya tajmahal ek hindu shiv mandir hain??

जिस तेजो महालय के अंदर भारत के हिंदुओ की गहन आस्था थी, उसे बदल कर इसे मकबरे का नाम दे दिया गया।
जिसे बाद में वामपंथी इतिहासकारों ने मुगलों द्वारा बनाया हुई इमारत बता कर भारत के इतिहास के साथ धोखा दिया।
जिस देश के अंदर पद्मनाभस्वामी मंदिर जैसे स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने हो वहां पर तेजो महालय जैसे शिव मंदिर मिलना आम बात थी और यही सत्य है जिसे बाद में कांग्रेस समर्थित सरकारों और वामपंथी इतिहासकारों ने बदल कर रख दिया।
 ताजमहल  पर शोध करने वाले शोधकर्ताओं की खोज यह कहती है कि जो मुख्य गुंबद है वह करीबन 900 वी शताब्दी के आसपास बना हुआ है, और जो मुख्य गुंबद के चारों ओर चार ईमारते हैं। उनका निर्माण मुख्य गुंबद के निर्माण के करीबन 400 साल बाद हुआ है

Tajmahal kab bana tha??

 यह जांच कोई कागजों में की गई जांच मात्र ही नहीं है, जबकि ताजमहल के संगमरमर, संगमरमर के पत्थरों की कार्बन डेटिंग से मिले परिणामों पर आधारित है।
ताजमहल एक खोज” नामक एक किताब इस पर शोध करने वाले भारतीय इतिहासकार शोधकर्ता श्रीमान एक साहब ने लिखी है जिसके अंदर आपको ताज महल के अंदर दफन रहस्य के बारे में पूर्ण रूप से पता चल सकता है।
 क्या आप जानते हैं??,  कि ताजमहल के पीछे के दरवाजे जो यमुना नदी की तरफ खुलते थे उन्हें इंदिरा गांधी की सरकार के समय केंद्र सरकार के आदेश द्वारा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था।
 इसका क्या कारण था??
 क्या इंदिरा गांधी नहीं चाहती थी कि भारत के इस बेजोड़ स्थापत्य कला के नमूने को हिंदुओं के द्वारा बनाया हुआ जाना जाए??
 हां, शायद यही एक कारण हो सकता है, क्योंकि शोधकर्ताओं की खोज कहती है कि ताजमहल का जो मुख्य गुंबद है उसके बीचो-बीच ऊपर से एक पानी की बूंद हमेशा नीचे स्थापित शिवलिंग के ऊपर गिरती रहती थी, जिससे शिवजी का अभिषेक हमेशा होता रहता था।
 वामपंथी इतिहासकारों ने ईसे शाहजहां के प्रेम का उदाहरण बताकर दुनिया के सामने पेश किया।
 यह कौन सा प्रेम था?? जिस राजा की 10 से ज्यादा रानियां थी. जिसके हरम में हजारों रखैले थी। उसको किससे सच्चा प्रेम हो गया??
Shahjahan wife
 नूरजहां की याद में बनाया हुआ हैं यह ताजमहल,ये वामपंथी इतिहासकार बताते हैं। नूरजहां खुद एक पहले से शादीशुदा स्त्री थी। जिसके पति को मारकर शाहजहां ने उससे शादी की थी। शाहजहां एक औरतों का शौकीन बादशाह था। जिसे ना राज पाट से मतलब था और ना किसी और से, उसे मतलब था तो केवल हिंदुओं के ऊपर किए गए अत्याचारों से।
 हिंदुओं के द्वारा बनाई गई कई बड़ी-बड़ी इमारतों को इन वामपंथी इतिहासकारों ने मुगलों का निर्माण बता दिया, अगर मुगलों के पास इतना दिमाग होता तो जहां से ये आए थे, 
वहां पर इन्होंने कोई निर्माण क्यों नहीं किया??
 क्या कोई सबूत है कि अफगानिस्तान ईरान पर्शिया कजाकिस्तान तुर्कमेनिस्तान इन जगह के ऊपर कोई ताजमहल या कुतुबमीनार जैसी ईमारते हैं??
 नहीं है,
क्योंकि उन्होने कुछ बनाया ही नहीं है। इन्होंने केवल पहले से बनाई गई इमारतों को तोड़फोड़ करके अपना नाम दे दिया। कुतुब मीनार के ऊपर लिखे गए शिलालेख और चित्र यह चीख चीख कर कहते हैं कि यह ध्रुव स्तंभ है, ना कि मुगलों के द्वारा मनाए की कोई मीनार।
 ताज महल के अंदर नीचे जाने की अनुमति किसी भी शोधकर्ता को कांग्रेसी सरकारों ने क्यों नहीं दी??
 इसका क्या कारण था??
 कारण बड़ा साफ सा है, अगर शोधकर्ता इस बात का पता लगा लेते कि यह इमारत कोई मुगलों के द्वारा बनाया गया निर्माण नहीं, जबकि हिंदू राजाओं के द्वारा बनाया गया एक महान शिव मंदिर है, जो आज से नहीं, कई हजार सालों से इस धरती के ऊपर विद्यमान है।
 इसका पता जब देश के हिंदुओं को चलेगा तो देश के अंदर एक तूफान सा उठेगा जो इन मुगल समर्थित सरकारों और नेताओं को उखाड़ कर फेंक देगा 
 यही डर शायद इंदिरा गांधी को सता रहा था। इसीलिए उसने ताजमहल के गुप्त दरवाजों को हमेशा के लिए बंद कर दिया। ताज महल के अंदर के कक्षों में वीणा, मृदंग और माता सरस्वती की मूर्तियां बनी हुई है।
 क्या किसी भी मुगल इमारतों के अंदर इन प्रतिमाओं का और इन मूर्तियों का होना जायज है??
 नहीं, यह एक हिंदू मंदिर था। जिसे बदलकर एक ताजमहल अर्थात मकबरे का नाम दे दिया गया।
 मुगलों ने यही किया था भारत के कायर जयचंदो के साथ मिलकर उन्होंने हिंदू राजाओं के द्वारा बनाई गई इमारतों को तोड़फोड़ कर अपना नाम दे दिया।
 शाहजहां एक उच्च किस्म का अय्याश आदमी था। जिसने केवल स्त्रियों और हिंदुओं पर अत्याचार किया। इस के राज में हिंदू कभी सुरक्षित नहीं थे, ना ही इसके बेटे औरंगजेब के राज में।

Tajmahal ka itihas

 आज कुछ वामपंथी लोग शाहजहां और औरंगजेब को भारत का बहुत बड़ा योद्धा बताते हैं, जबकि वह यह भूल जाते हैं कि भारत का इतिहास इस पूरे संसार से सबसे पुराना है। हमारे भारत को किसी विदेशी ने नहीं खोजा था, उसने केवल भारत आने तक का एक समुद्री रास्ता खोजा था ना कि भारत को खोजा था।
 भारत का अस्तित्व तब से है जब इस संसार के अंदर कोई अन्य धर्म विद्यमान भी नहीं था। इन मुगलों ने भारत के खजाने को जमकर लूटा और अफगानिस्तान में अपने परिवार और अपने कबीले के लोगों को इनसे अमीर कर दिया।
 ताजमहल को मुगल निर्माण बताने वाले वामपंथी इतिहासकार यह भूल जाते हैं कि भारत के अंदर और भी ऐसे कई स्थापत्य कला के नमूने हैं। जिन्हें आप मुगल निर्माण बताना तो चाहते थे परंतु भारत के हिंदू समुदाय तब तक जाग चुके थे।
Somnath mandir
 गुजरात के जूनागढ़ के सोमनाथ मंदिर (Somnath mahadev) को मुगलों ने इतनी बार तोड़ा था परंतु फिर भी यह मंदिर बार-बार हिंदू राजाओं के द्वारा बनाया गया और आज भी अपने वर्चस्व और गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित करता हुआ इस संसार के अंदर अपनी सुंदरता को बिखेर रहा है।
 मुगलों के पास इतना दिमाग होता तो वे कृषि करके अपने बच्चों का पेट पालते ना कि निरपराध जानवरों को मारकर अपना पेट भरते।
आज भी अगर सरकार इस शिव मंदिर पर शोध करने की अनुमति वैज्ञानिकों को दे तो इसका वास्तविक रहस्य सबूतों के साथ दुनिया के सामने लाया जा सकता हैं।
जिस उद्यान को एक गुरुकुल के रूप में संगीत के शिक्षा के केंद्र के रूप में बनाया गया उसे आज दुनिया एक मकबरे के नाम से जानती हैं।
नूरजहां को उत्तरप्रदेश के एक जगह किसी मकबरे में दफनाया गया था फिर उसका मृत शरीर इस तेजो महालय में केसे आ गया ?? यह एक रहस्य ही हैं जिसे मुगलों और कांग्रेसी इतिहासकारों ने तोड़ मरोड़ कर पेश कर के भारत के हिंदू राजाओं के गौरवशाली इतिहास को तोड़ कर मुगलों का बता दिया गया।
यह वही congress सरकार थी जिसने चंद्रगुप्त द्वारा बनाए गए उतर पथ को शेरशाह का निर्माण बता दिया। जिसे आज grant road के नाम से जाना जाता हैं।
सत्य को छुपाने के कितने ही प्रयत्न कर लो पर सत्य हमेशा अपने अस्तित्व में वापिस आ जाता हैं। आज नही तो आज से कुछ सालो बाद में इसका वास्तविक रहस्य भी दुनिया के सामने आ जाएगा।
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